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शिक्षा मंत्री प्रदेश को ड्रेस और पाठ्यक्रम के नाम पर भ्रमित कर रहे है –  संयुक्त अभिभावक संघ

जयपुर। दिसंबर माह में प्रदेश को नई सरकार मिली किंतु अभिभावकों के मुद्दे जस के तस ही बने हुए है, विगत चार महीनों में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर धर्म को आधार बनाकर कभी किताबों के पाठयक्रम का मुद्दा बना रहे है तो कभी स्कूल यूनिफॉर्म का मुद्दा उझालकर प्रदेश की जनता का ध्यान भटका रहे है। जिस संयुक्त अभिभावक संघ ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक अभिभावकों को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा की प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के असल मुद्दों पर काम करने की बजाय शिक्षा मंत्री सत्ता का दुरुप्रयोग कर लोगों को धर्म के नाम पर भटका रहे है।

संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा की राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसमें निजी स्कूलों की मनमानी फीस, किताब – कॉपियों के नाम पर दो – तिहाई महंगाई रेट पर लूट, आरटीई में एडमिशन सहित लगातार बंद हो रहे सरकारी स्कूलों का मुद्दा है जिस पर शिक्षा मंत्री का पिछले चार महीनों में एक बार भी बयान नहीं आ रहा है, प्रदेश के लाखों छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे है, करोड़ों अभिभावक निजी स्कूलों की खुली लूट से प्रताड़ित हो रहे है, जिस पर राजस्थान ध्यान देने की बजाय अपना लोकसभा चुनाव में धर्म के नाम का सहारा लेकर राजनीतिक षडयंत्र रचकर जनता का ध्यान भटका रहे है।

राजस्थान के निजी स्कूलों में फीस एक्ट कानून कब लागू होगा, सुप्रीम कोर्ट 3 मई 2021 को इसे लागू करने का आदेश दे चुकी है।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू

प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने मीडिया के माध्यम से राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से पूछा है की राजस्थान के निजी स्कूलों में फीस एक्ट कानून कब लागू होगा, इसे लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट 3 मई 2021 को अपना फैसला भी सुना चुकी है, किंतु ना पूर्वर्ती कांग्रेस सरकार ने इसे लागू करवाया और ना ही वर्तमान सरकार इसे लागू करवा पा रही है, जबकि यह फीस एक्ट कानून पूर्वर्ती भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार लाया गया था उसके बावजूद आज तक भी प्रदेश के 99.99 फीसदी स्कूलों में इस एक्ट की पालना नही हो रही है जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुलेआम अवमानना है जो ना केवल राजस्थान सरकार कर रही है बल्कि निजी स्कूल संचालक व शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे है।

क्या है निजी स्कूलों पर फीस एक्ट कानून

इस एक्ट के अनुसार प्रत्येक निजी स्कूल संचालकों को नए सत्र प्रारंभ होने के साथ ही पेरेंट्स – टीचर एसोसियेशन (PTA) का गठन करना अनिवार्य होगा, जिसका सदस्यता शुल्क शहरी क्षेत्र में 50 रु और ग्रामीण क्षेत्रों मे 30 रु वार्षिक फीस रहेगी, इस एसोसियेशन ने प्रत्येक पेरेंट्स और टीचर सदस्य रहेंगे, इसके पश्चात एक निर्धारित समय 15 अगस्त से पहले 10 सदस्यों की स्कूल केवल फीस कमेटी (SLFC) का चुनाव करना अनिवार्य है, जिसमें स्कूल संचालक/डायरेक्टर/चेयरमैन/ट्रस्टी इस कमेटी के अध्यक्ष होगे और स्कूल प्रिंसिपल इस कमेटी की सचिव रहेंगे, इस कमेटी में 3 टीचरों को रखना अनिवार्य होगा एवं एक्ट की गाइड लाइन के  अनुसार उपयोगी 5 अभिभावकों का लॉटरी सिस्टम से चयन करना अनिवार्य रहेगा। इस कमेटी के गठन के पश्चात लास्ट सत्र के सभी खर्चों को कमेटी के सभी सदस्यों के सामने रखा जाएगा, खर्चों के आधार पर स्कूल अपनी फीस तय कर सकता है, जो अगले सत्र के लिए होगी।

स्कूलों का खर्च 25 पैसे वसूली 5 रु

अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा की निजी स्कूलों का प्रत्येक विद्यार्थी पर अगर 25 पैसे खर्च हो रहे है तो वह अभिभावकों से 5 रु की वसूली करते है, जिसका माध्यम केवल स्कूल फीस ही नही बल्कि किताबे, कॉपियां, ड्रेस, पिकनिक ट्यूर, लेट फीस पेनल्टी, ट्रास्पोर्ट फीस, एक्जाम फीस, फॉर्म फीस आदि इत्यादि माध्यमों से की जा रही है। इसलिए निजी स्कूल स्कूलों में एक्ट लागू नही कर रहे है और कमेटी में खर्चों को दिखाने से डरते है, क्योंकि इन खर्चों में ऐसे ऐसे खर्चे भी जोड़ दिए जाते है जो स्कूल के खर्चों में शामिल ही नही होते है। एक्ट लागू करने की मांग को लेकर पूर्वर्ती कांग्रेस सरकार को भी अनगिनत ज्ञापन दिए थे और अब वर्तमान सरकार को भी लगाता ज्ञापन दे रहे है और फीस एक्ट कानून को लागू करने की मांग कर रहे है। किंतु एक्ट लागू होने की बजाय निजी स्कूलों की मनमानी लगातार बढ़ रही है और सरकार, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग की खामोशी भी लगातार बढ़ रही है।

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