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शास्त्र को जानकर भी जो आचारण नही करता वह सबसे बड़ा अज्ञानी – आचार्य सौरभ सागर

जयपुर। धर्मनगरी छोटी काशी के नाम से विख्यात पिंकसिटी जयपुर शहर के प्रताप नगर में चल रहे गणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के शिष्य, जीवन आशा हॉस्पिटल के प्रेरणा स्त्रोत आचार्य सौरभ सागर महाराज ने चौथे दिन शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के संत भवन में कहा की ” निश्चय गुरु के पास पहुंचने के लिए, व्यवहार गुरु के पास जाना जरूरी है ; क्योंकि व्यवहार पथ है, निश्चय मंजिल है व्यवहार भोजन है, निश्चय शक्ति है। व्यवहार साधन है, निश्चय साध्य है। व्यवहार नींव है, निश्चय कलश है। परमात्मा एवं शास्त्र मील के पत्थर है। इसमें परमात्मा नही है पर परमात्मा तक पहुंचने के इशारे है। प्रारंभिक अवस्था में इसका अवलम्बन लेना आवश्यक है। निश्चय में पहुंचने के उपरांत ये बाहरी साधन अपने आप छूट जाते है।

आचार्य श्री ने कहा कि – जुड़ शास्त्र एवं परमात्मा में गुण विद्यमान नही है पर इसके बिना भी गुण नही है। निराकार परमात्मा एवं निराकार ध्वनि तक पहुंचने के लिए साकार परमात्मा और शास्त्र का अवलम्बन जरूरी है। बीज के अभाव में वृक्ष की आकांक्षा करना अपनी अज्ञानता प्रकार करना है। परमात्मा सर्वव्यापी अवश्य है पर उसकी आकृति सर्वव्यापी नही है, आकृति में कैद करके परमात्मा को पूजना मूर्खता नही निराकार को सब कुछ मान निठल्ले बैठ जाना आराधना, पूजा वंदना आदि न करना मूर्खता है। परमात्मा की प्रतिमा को पूजकर आत्मा की प्रतिभा जागृत करने का पुरुषार्थ करना सम्यक पुरुषार्थ है।

कार्याध्यक्ष दुर्गालाल जैन ने कहा की आचार्य सौरभ सागर महाराज की प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से संत भवन में प्रवचन श्रृंखला आयोजित हो रही है, जिसमें जयपुर सहित देशभर से श्रद्धालुगण ज्ञान की गंगा का रसपान कर अपने जीवन को सफल बनाने की राह की ओर अग्रसर होते है।

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