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खेला नाट्य समारोह में दर्शकों ने उठाया भेळी बात और द ज़ू स्टोरी नाटकों का लुत्फ

संवाद प्रवाह में विशेषज्ञों ने की नाटक पर साहित्यिक चर्चा

जयपुर (24 समाचार)। कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, जवाहर कला केन्द्र और क्यूरियो की सहभागिता में कला संसार के तहत आयोजित खेला हास्य नाट्य समारोह के दूसरे दिन दर्शकों ने दो नाटकों ‘भेळी बात’ और ‘द ज़ू स्टोरी’ का लुत्फ उठाया। नाटक के बाद नाटक पर साहित्यिक दृष्टि से चर्चा की

स्व. कुलदीप माथुर को समर्पित रहा नाटक ‘द ज़ू स्टोरी’

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से असिस्टेंट प्रोडक्शन मैनेजर उत्पल झा के निर्देशन में हुआ नाटक ‘द ज़ू स्टोरी’

जयपुर के लाइट डिजाइनर और निर्देशक स्व. कुलदीप माथुर को समर्पित रहा।

यह नाटक एडवर्ड एल्बी ने लिखा है। नाटक पीटर और जैरी के इर्द—गिर्द घूमता है। दोनों एक पार्क बेंच पर मिलते हैं। पीटर एक धनी प्रशासनिक अधिकारी है जिसका भरापूरा परिवार है। जैरी एक अलग-थलग निराश व्यक्ति है, जो दूसरे इंसान के साथ सार्थक बातचीत करने के लिए बेताब है, वह पीटर से पूछताछ करके उसकी शांतिपूर्ण स्थिति में हस्तक्षेप करता है और उसे अपनी जीवन गाथा सुनने और चिड़ियाघर में उसकी यात्रा के पीछे के कारण को जानने के लिए मजबूर करता है। इसी बीच मंच पर व्यंग्यात्मक और हास्य संवादों के साथ कहानी आगे बढ़ती है। अपनी कहानी सुनाने को आतुर जैरी से पीटर का मन भर जाता है। पीटर जाने की कोशिश करता है, इसी बीच जैरी की उकसाने की कोशिश की प्रतिक्रिया स्वरूप पीटर से जैरी की हत्या हो जाती है।

 

ममता माथुर ने डाला कुलदीप माथुर की रंगयात्रा पर प्रकाश

अभिनेत्री ममता माथुर ने स्व. कुलदीप माथुर की रंगयात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे बचपन से ही अभिनय में रुचि रखते थे।उन्होंने बहुत से नाटकों का निर्देशन किया था एवं कई राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया था। एक अच्छे अभिनेता व नाट्य निर्देशक होने के साथ ही कुलदीप माथुर मंच तकनीकी में भी एक्सपर्ट थे। नाटकों में उनके द्वारा की जाने वाली प्रकाश परिकल्पना व संचालन बहुत ही उत्कृष्ट हुआ करता था। उन्होंने मंच सहायक के पद पर रहते हुए हर कलाकार की मदद की।इस तरह रंगकर्म के लिए हमेशा समर्पित रहते हुए इसे नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया।

 

बातपोशी शैली में नाटक “भेळी बात” का मंचन

अनिल मारवाड़ी के निर्देशन में नाटक “भेळी बात” का मंचन हुआ जो बाल नाट्य रंगकर्मी स्व. निधि ताम्हनकर जैन को समर्पित रहा।

राजस्थानी कहावतों, बातों और छंदों का रोचक व अभिनव संयोजन है नाटक ‘भेळी बात’। राजस्थानी की चर्चित शैली बातपोशी को आधार बनाकर भेळी बात में राजस्थानी भाषा की कहावतों, किस्से, दोहे और छंदों के संकलन का अभिनय के साथ संयोजन कर रचनात्मक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। इस प्रस्तुति का लेखन, निर्देशन अनिल मारवाड़ी का रहा। प्रकाश व्यवस्था राजेन्द्र शर्मा ‘राजू’ ने संभाली।

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