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भजन-भक्ति के साथ श्रीजी का हुआ कालशाभिषेक, श्रद्धालुओं ने किया पूजन

विधायक अशोक लाहोटी, राजेश जैन दिल्ली ने लिया आचार्य सौरभ सागर का आशीर्वाद

जयपुर (24 समाचार)। प्रताप नगर के सेक्टर 8 में धर्म के प्रचार-प्रसार की गंगा का महामहोत्सव श्रद्धाभक्ति और हर्षोल्लास के साथ आचार्य सौरभ सागर महाराज के सानिध्य में चल रहा है, रविवार को महोत्सव के तीसरे दिन अनुष्ठान स्थल पर भगवान शांतिनाथ स्वामी के स्वर्ण एवं रजत कलशों से कालशाभिषेक संपन्न हुए जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति आराधना और जयकारों के साथ भगवान का अभिषेक किया और विश्व में शांति की कामना करते हुए शांतिधारा कर अर्घ चढ़ाए। प्रातः 7.30 बजे सिद्ध परमेष्ठि भगवान की मंगलाचरण कर भजनों और जयकारों के साथ मंत्रो का उच्चारण कर अष्ट द्रव्यों के साथ विधानपुजन किया। इस दौरान पूजन ने सम्मिलित इंद्र – इंद्राणियों सहित सभी श्रावक और श्राविकाओ ने भावों के साथ जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नेवेघ, दीप, धूप, फल एवं महाअर्घ चढ़ाएं।

चातुर्मास समिति के मुख्य संयोजक शिखरचंद जैन ने बताया की रविवार को महोत्सव के तीसरे दिन सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी, राजेश जैन बंटी रोहणी नगर, दिल्ली, समाजसेवी विनय सोगानी, आलोक जैन तिजारिया सहित दिल्ली, यूपी, हरियाणा से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया और आचार्य श्री का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। जिनका स्वागत सम्मान श्री पुष्प वर्षायोग समिति के गौरवाध्यक्ष राजीव जैन गाजियाबाद वाले, अध्यक्ष कमलेश जैन, उपाध्यक्ष कमल सोगानी, मंत्री महेंद्र जैन, मुख्य समन्वयक गजेंद्र बड़जात्या, कोषाध्यक्ष धर्मचंद जैन, मुख्य निर्देशक जितेंद्र जैन जीतू, और प्रचार संयोजक सुनील साखुनियां द्वारा किया गया। इस दौरान नरेंद्र जैन आवा वाले, राजेंद्र सोगानी, चेतन जैन निमोडिया, बाबू लाल जैन इटुंडा सहित विभिन्न समाजसेवी भी उपस्थित रहे।

इस बीच प्रातः 8.30 बजे आचार्य सौरभ सागर महाराज ने मंगल आशीर्वचन दिए जिसका लाभ सभी अतिथियों सहित श्रद्धालुओं और श्रावकों ने लिया।

धर्म का पालन करो तो अहंकार, स्वार्थ का त्याग करो, दूसरों से पहले खुद पर विश्वास करो – आचार्य सौरभ सागर

रविवार को आचार्य सौरभ सागर ने अपने आशीर्वचनों में कहा की – आज का प्रत्येक प्राणी धर्म की बात तो करता है किंतु धर्म के बताए मार्ग का पालन बिल्कुल भी नही करता, कोई धर्म किसी का अहित नहीं चाहता और ना ही किसी प्राणी को अहंकारी और स्वार्थी बनने की शिक्षा देता है। जो प्राणी खुद को कमजोर समझते है जो खुद पर विश्वास नहीं करते है वही प्राणी अहंकार और स्वार्थ के रास्तों का पालन करते है। जो धर्म के बताए मार्ग के बिलकुल विपरीत होता है। प्रत्येक प्राणी को धर्म का पालन करना चाहिए और अहंकार, स्वार्थ का त्याग कर दूसरों पर विश्वास करने से पहले खुद पर विश्वास करना चाहिए। जो प्राणी इस मार्ग पर चलते है वह श्रेष्ठ श्रावक और श्रेष्ठ प्राणी बनने के सौभाग्यशाली बनते है।

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