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आरटीई पर विवाद स्कूल, सरकार और प्रशासन का सुनियोजित षडयंत्र, 50 हजार से अधिक बच्चों का भविष्य कर रहे है खराब

जयपुर। आरटीई की लेकर विवाद गहराता जा रहा है, सरकार ने आरटीई में एडमिशन प्रक्रिया पूरी कर ली है, बच्चों के एडमिशन को लेकर लॉटरी भी जारी कर दी है, किंतु हर बार की तरह इस बार भी प्रदेश के निजी स्कूल संचालक कोर्ट में चले गए है और कोर्ट का हवाला देकर बच्चों के एडमिशन नहीं ले रहे है। स्कूलों के इस व्यवहार से प्रदेश के 50 हजार से अधिक बच्चों का भविष्य बनने से पहले तबाह होने की कगार पर खड़ा हो गया है। संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा की ” आरटीई (राइट टू एजेकेशन) पर सरकार की पोल खुलकर सामने आ गई है, सरकार दिखावा करने के दौरान बड़े-बड़े कर जरूरतमंद और गरीब परिवारों के सपने को संजोती है और जब वही जब धरातल पर उतरकर सरकार के दावों को फोलो करते है तो उन अभिभावकों को ठोकरें खाने के अलावा कुछ हासिल नहीं होता है।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा की ” आरटीई पर विवाद बेवजह है, यह केवल गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चे को शिक्षा से दूर रखने का सुनियोजित षडयंत्र है, स्कूल, सरकार और प्रशासन मिलकर अभिभावकों में एकजुटता ना होने का फायदा उठाकर उनके बच्चों को शिक्षा से दूर रखने की साजिश रच रहे है। पिछले वर्ष भी स्कूलों द्वारा आरटीई मसले पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसका परिणाम इस वर्ष फरवरी में आया था, जब सत्र समाप्त हो गया। जिसके चलते पिछले वर्ष भी हजारों छात्रों का साल खराब हो गया। अब नवीन सत्र के प्रारंभ होने से पहले ही स्कूल और स्कूलों के संगठन मिलकर आरटीई प्रक्रिया के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए है। कोर्ट ने प्रक्रिया पर रोक लगा दी, अब स्कूल वाले कोर्ट आदेश का हवाला देकर चयनित बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे है, अभिभावक स्कूल और प्रशासन के चक्कर काट रहे है किंतु कही न्याय नही मिल रहा है। स्कूल और सरकार की लड़ाई में ना केवल अभिभावक पीस रहे बल्कि छात्रों का भविष्य भी बिगड़ रहा है और जो देश में राइट टू एजुकेशन कानून बनाया गया है उसका खुलेआम मजाक बनाया जा रहा है।

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