धर्म

आचार्य विद्यासागर महामुनिराज का छत्तीसगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ पर हुआ समाधिमरण, दोपहर 1 बजे होगे पंचतत्व में विलीन

जयपुर, (24 समाचार)। भारतवर्षीय दिगंबर जैन समाज के विख्यात संत शिरोमणी, युग दृष्टा आचार्य प्रवर विद्यासागर महामुनिराज का शनिवार, माघ शुक्ल अष्टमी पर्वराज के अंतर्गत उत्तम सत्य धर्म के दिन रात्रि में 2:35 बजे समाधिमरण हो गया है। आचार्य विद्यासागर छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में विराजमान थे, कुछ समय से आचार्यश्री का स्वास्थ्य खराब चल रहा था। जिसको लेकर देशभर का जैन समाज आचार्य विद्या सागर महाराज के स्वास्थ्य लाभ की कामना को लेकर प्रतिदिन नमोकर महामंत्र का जप्तनुष्ठान भी कर रहा था।

अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने जानकारी देते हुए बताया की आचार्य विद्यासागर महाराज ने जैन धर्म के अनुसार विधिवत सल्लेखना धारण कर और आचार्य पद का भी त्याग करते हुए समाधिमरण का वैभव प्राप्त किया है, आचार्यश्री की अंतिम यात्रा (डोल यात्रा) दोपहर 1 बजे छत्तीसगढ़ के डोंगर में स्थित चंद्रगिरी तीर्थ पर निकाली जाएगी और जैन परम्परा के अनुसार आचार्य विद्या सागर महाराज को पंचतत्व में विलीन किया जायेगा। गुरुवर के देवलोक गमन से संपूर्ण भारतवर्ष में शोक की लहर दौड़ पड़ी है, इस दौरान जैन श्रद्धालु अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे और मंदिरों में सामूहिक जपयानुष्ठान करेगे।

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